अग्निहोत्र
ऊर्जा प्राप्त करने का सरल सजह मार्ग
अग्निहोत्र क्या है
ठीक सूर्योदय- सूर्यास्त के समय गाय के गोबर के कण्डों से जले हुए लाल अलाव में दो चुटकी चावल और घी से मिश्रित दाे आहुति देने की प्रक्रिया का नाम अग्निहोत्र है। आहुति एक निश्चित आकार के मिट्टी या तांबे के पात्र में देशी गाय के गोबर के बने कण्डों की अग्नि में निश्चित मंत्रों के उच्चारण के साथ आहुति दिया जाता है।

सबसे पहले किसान भाई RAH FPO मोबाइल एप डाउनलोड करके ऑनलाइन अग्निहोत्र किट आर्डर करें। अग्निहोत्र किट में आवश्यक सभी सामग्री कंडे, घी, चावत् कपूर, माचीस, पुस्तकें और अग्नहोत्र पात्र प्राप्त होगा। पात्र में दो समय अग्निहोत्र करने के लिए कंडे होंगे, आगे निरंतर अग्निहोत्र करने के लिए अतिरिक्त कंडों के बैग की आर्डर कर ले या अपने घर पर भारतीय स्वस्थ्य गाय के गोबर के कंडे बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दें। अग्निहोत्र का निश्चित समय प्राप्त करने के लिए अपने मोबाइल में माधव आश्रम अग्निहहोत्र एप डाउनलोड कर लें और गुगन लोकेशन ऑन करके अपने खेत या घर का (जहाँ अग्निहोत्र करना है) लोकेशन सेट करे लें। एप की सेटिंन में जाकर स्क्रीन डिस्पले कॉनडाउन ऑन कर लें, सूर्योदय, सूर्यास्त में अग्निहोत्र समय के 15 मिनट पूर्व कंडों को आयताकार तोड़कर आड़ा तिरछा जमाना है। एक टुकड़ा चौकोर तोड़कर अग्निहोत्र पात्र की पेंदी में जमा दें। बाकि कंडों को निम्न तरीके से जमा लें।
अग्निहोत्र का निश्चित समय प्राप्त करने के लिए अपने मोबाइल में माधव आश्रम अग्निहहोत्र एप डाउनलोड कर लें और गुगन लोके शन ऑन करके अपने खेत या घर का (जहाँ अग्निहोत्र करना है) लोके शन सेट करे लें। एप की सेटिंग में जाकर स्क्रीन डिस्पले काॅ नडाउन आॅन कर लें, सूर्योदय, सूर्यास्त में अग्निहोत्र समय के 15 मिनट पूर्व कं डों को आयताकार तोड़कर आड़ा- तिरछा जमाना है।
एक टुकड़ा चौकोर तोड़कर अग्निहोत्र पात्र की पेंदी में जमा दें। बाकि कं डों को निम्न तरीके से जमा लें। अब घी की बाती या कपूर या गुगल के टुकड़े को जलाकर नीचे पेंदी में डाल दें ऊपर कं डे का एक टुकड़ा रखकर ढक दें ताकि लाल अलाव बनने तक कं डे जल जाएं ।
3 मिनट पहले दो चुटकी चावल और एक बूंद घी बाएं हथेली में रकखर और मिलाकर दो भाग बना लें। ऊपर का कं डे का ढक्कन हटाकर आचमनी से अग्निहोत्र का मुख चौड़ा कर लें अब जसे ै ही अग्निहोत्र का समय होता है वसे ह ै ी सूर्योदय में सूर्योदय का मंत्र और सूर्यास्त में सूर्यास्त का मंत्र बोलते हुए ये दोनों आहुति अग्निहोत्र पात्र में डालना है।
सूर्योदय का मंत्र -
प्रजापतये स्वाहा प्रजापतये इदम् न मम //” (आहुति छोड़ें)
सूर्यास्त का मंत्र -
प्रजापतये स्वाहा - प्रजापतये इदं न मम (आहुति छोड़ें)
आहुति देने के बाद कमर सीधी रखते हुऐ अग्नि पर ध्यान के न्द्रित करें जब तक आहुति जल रही है, तब तक शांत चित्त बठें रहें। अग्निहोत्र पात्र को अगले 12 घंटे तक के ै लिए वहीं यथावत रहने दें, हिलाएं नहीं। अगले अग्निहोत्र के पूर्व भस्म को किसी काँच या मटके के पात्र में रख लें। प्राप्त भस्म से ऊर्जा जल बनाकर स्वयं सुबह शाम एक-एक गिलास पीएं और 200 लीटर ऊर्जा जल को खेत की भूमि मंे सिंचाई जल के साथ डालें। ऊर्जा जल बनाने की प्रक्रिया निम्न है।
सामग्री स्प्रे के लिए सिंचाई के साथ
| अग्निहोत्र भस्म | 100 ग्राम | 100 ग्राम |
|---|---|---|
| फिटकरी (Alum) | 20 ग्राम | 100 ग्राम |
फिटकरी को पीस लो और इसमें भस्म मिलाकर 200 लीटर पानी में डाल दों ऊर्जा जल तैयार हो जाएगा।
अग्निहोत्र का प्रस्फुटन केन्द्र
माधव आश्रम, बैरागढ़ भोपाल
ठीक सूर्योदय, सूर्यास्त में किया जाने वाला अग्निहोत्र भारत की प्राचीन विद्या है, वेदो, उपनिषदों में इसका वर्णन है। कालंतर में यह विद्या लुप्त हो गई थी। परम सतगुरु गजानंद जी (श्रीजी) के आदेश से महानुभाव श्री माधव स्वामी पोद्दार जी ने 22 फरवरी 1963 को भोपाल बैरागढ़ की भूमि में अग्निहोत्र का पुनः प्रस्फुटन किया। और इस यज्ञ को जन-जन तक पहुँचाने के लिए प्रचार कार्य प्रारंभ किया। बाद में महानुभाव माधव जी की परम् शिष्या परम पूज्या नलिनी जी ने माधव आश्रम भोपाल का निर्माण कर इस कार्य को विश्वव्यापी बना दिया। अग्निहोत्र करने वाले प्रत्येक बंधु को माधव स्वामी एक परिचय, सुख की खोज, धर्मपाठ जरूर पढ़ना चाहिए। माधव आश्रम का यू-ट्यूब चैनल, माधव आश्रम ट्रस्ट ऑफिशियल अग्निहोत्र भोपाल चैनल सबस्क्राईब कर इससे आने वाली जानकारी को निरंतर प्राप्त करते रहना चाहिए।
अग्निहोत्र कृषि क्रांत
अग्निहोत्र भस्म से तैयार ऊर्जा जल मिट्टी की नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करता है। इसके प्रयोग से हानिकारक फंगस, वायरस और जीवाणु नष्ट होते हैं और भूमि पुनः सकारात्मक हो जाती है। बीजोपचार में अग्निहोत्र भस्म का उपयोग करने से बीजों का अंकुरण प्रतिशत बढ़ जाता है, फसलों की जड़ें अधिक मजबूत और स्वस्थ बनती हैं। यदि फसल में फंगस, वायरस या जीवाणु जनित बीमारी हो, तो 20% ऊर्जा जल का स्प्रे करने पर बीमारी धीरे-धीरे समाप्त होने लगती है। खेती के दौरान जब शुरू से ही सिंचाई के पानी में अग्निहोत्र भस्म मिलाया जाए और फसलों पर नियमित रूप से 20% ऊर्जा जल का छिड़काव किया जाए, तो 90% तक फंगस, वायरस और कीटजनित रोग फसलों पर आते ही नहीं हैं। यह कई किसानों का वास्तविक अनुभव है। ताराचंद बेलजी तकनीक – TCBT पंचमहाभूत कृषि में अग्निहोत्र ऊर्जा विज्ञान का व्यापक प्रयोग किया जाता है। अब तक हमने 38 प्रकार की फसलों में रासायनिक खेती से भी अधिक उपज प्राप्त की है। आप TCBT पाठशाला (YouTube Channel) के "38 फसलों में रिकॉर्ड उत्पादन" प्लेलिस्ट में जाकर इन सभी फसलों को देख सकते हैं— जहाँ बिना यूरिया के फसलें अत्यंत हरी-भरी, बिना DAP के पौधों की ऊँचाई डेढ़ से दो गुना, और पत्ते 2 से 3 गुना बड़े दिखाई देते हैं। यही कारण है कि हमें प्रत्येक फसल में अधिकतम उत्पादन प्राप्त हो रहा है।
अग्निहोत्र से मानव स्वास्थ
अग्निहोत्र भस्म से तैयार ऊर्जा जल मिट्टी की नकारात्मक ऊर्जा, फंगस, वायरस और हानिकारक जीवाणुओं को समाप्त कर भूमि को पुनः स्वस्थ बनाता है। अग्निहोत्र भस्म से बीजोपचार करने पर अंकुरण प्रतिशत बढ़ जाता है और फसलों की जड़ें अधिक मजबूत होती हैं। यदि फसल में कोई फंगस, वायरस या जीवाणु जनित बीमारी हो तो 20% ऊर्जा जल का छिड़काव करने पर बीमारी कम होने लगती है। खेती की शुरुआत से ही सिंचाई के पानी में अग्निहोत्र भस्म मिलाकर और नियमित रूप से 20% ऊर्जा जल का स्प्रे करने पर 90% तक रोग और कीट फसलों पर आते ही नहीं हैं, जो अनेक किसानों का प्रमाणित अनुभव है। ताराचंद बेलजी तकनीक (TCBT पंचमहाभूत कृषि) में अग्निहोत्र ऊर्जा विज्ञान का गहन प्रयोग किया जाता है और अब तक 38 प्रकार की फसलों में रासायनिक खेती से भी अधिक उपज प्राप्त की गई है, जिसे TCBT पाठशाला यूट्यूब चैनल की "रिकॉर्ड उत्पादन" प्लेलिस्ट में देखा जा सकता है, जहाँ बिना यूरिया और DAP के भी पौधे अत्यंत हरे-भरे, ऊँचे और बड़े पत्तों वाले दिखाई देते हैं।
प्रतिदिन सुबह-शाम एक-एक गिलास ऊर्जा जल पीएं

