प्रकृति की दिखाई देने वाली 4% भौतिक दुनिया को प्रकृति की न दिखाई देने वाली 96% सुक्ष्म दुनिया ने बनाया है। सुक्ष्म दुनिया के तीन स्तर हैं। पहला ऊर्जा का स्तर, दुसरा अणु का स्तर, तीसरा जीवाणुओं का स्तर। पूरी धरती में इन्सानों की जितनी आबादी है उससे ज्यादा आबादी एक ग्राम मिट्टी में जीवाणुओं की होती है। एक ग्राम मिट्टी में अरबों जीवाणु होते हैं, उससे खरबों गुना ज्यादा एक ग्राम मिट्टी में अणु होते हैं और उससे भी अनंत गुना ज्यादा एक ग्राम मिट्टी में ऊर्जा होती है।
TCBT वृक्षायुर्वेद विज्ञान से पिछले 15 वर्षों के निरंतर अध्ययन, चिंतन एवं शोध के बाद सुक्ष्म दुनिया के इन तीनों स्तरों को खेती के लिए उच्च बनाया है, अनुकूल बनाया है। इसलिए TCBT वृक्षायुर्वेद विज्ञान में अभी तक हजारों किसान ने रासयनिक खेती के अनुपात में ज्यादा उत्पादन प्राप्त कर लिया है। अभी तक TCBT वृक्षायुर्वेद विज्ञान में खेती की रसायन मुक्त, जहर मुक्त आदान प्रक्रिया से 38 फसलों का अधिकतम रिकार्ड उत्पादन प्राप्त कर लिया गया है।
सबसे पहले किसान भाई RAH FPO मोबाइल एप डाउनलोड करके ऑनलाइन अग्निहोत्र किट आर्डर करें। अग्निहोत्र किट में आवश्यक सभी सामग्री कंडे, घी, चावत् कपूर, माचीस, पुस्तकें और अग्नहोत्र पात्र प्राप्त होगा। पात्र में दो समय अग्निहोत्र करने के लिए कंडे होंगे, आगे निरंतर अग्निहोत्र करने के लिए अतिरिक्त कंडों के बैग की आर्डर कर ले या अपने घर पर भारतीय स्वस्थ्य गाय के गोबर के कंडे बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दें। अग्निहोत्र का निश्चित समय प्राप्त करने के लिए अपने मोबाइल में माधव आश्रम अग्निहहोत्र एप डाउनलोड कर लें और गुगन लोकेशन ऑन करके अपने खेत या घर का (जहाँ अग्निहोत्र करना है) लोकेशन सेट करे लें। एप की सेटिंन में जाकर स्क्रीन डिस्पले कॉनडाउन ऑन कर लें, सूर्योदय, सूर्यास्त में अग्निहोत्र समय के 15 मिनट पूर्व कंडों को आयताकार तोड़कर आड़ा तिरछा जमाना है। एक टुकड़ा चौकोर तोड़कर अग्निहोत्र पात्र की पेंदी में जमा दें। बाकि कंडों को निम्न तरीके से जमा लें।
अब घी की बाती या कपूर या गुगल के टुकड़े को जलाकर नीचे पेंदी में डाल दें ऊपर कंडे का एक टुकड़ा रखकर ढक दें ताकि लाल अलाव बनने तक कंडे जल जाएं। 3 मिनट पहले दो चुटकी चावल और एक बूंद घी बाएं हथेली में रकखर और मिलाकर दो भाग बना लें। ऊपर का कंडे का ढक्कन हटाकर आचमनी से अग्नहोत्र का मुख चौड़ा कर लें अब जैसे ही अग्निहोत्र का समय होता है वैसे ही सूर्योदय में सूर्योदय का मंत्र और सूर्यास्त में सूर्यास्त का मंत्र बोलते हुए ये दोनों आहुति अग्निहोत्र पात्र में डालना है।
अग्निहोत्र का प्रस्फुटन केन्द्र





