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TCBT प्राकृतिक खेती से किसानों की जीवन बदलने वाली उपलब्धियाँ

ऊर्जा जल, अणु जल, जीवाणु जल, फसल घुट्टी और हाई सीएन रेशियो स्लरी घोल के उपयोग से नीबू, अमरूद, मिर्च, टमाटर और जीरा सहित 35 से अधिक फसलों की उपज आसपास की रासायनिक खेती से अधिक मिली और लगभग 500 एकड़ में 20 करोड़ रुपये का प्रमाणित जैविक टर्नओवर बना।
– श्री लेखराम यादव, ग्राम गोरधनपुरा, कोटपुतली, राजस्थान

पत्थर और मुरूम वाली भूमि में टीसीबीटी विधि से गोबर की कम्पोस्ट खाद, लाल–सफेद मिट्टी, गोवर्धन खाद और हरी खाद मिलाकर बेड बनाए गए, जिससे केवल 8 माह में प्रति एकड़ लगभग 23 टन अदरक की रिकॉर्ड उपज प्राप्त हुई।
– श्री बाला साहेब माने, कुम्बडगांव, तह. गोरेगांव, जिला सतारा, महाराष्ट्र

रासायनिक खेती की बढ़ती लागत से परेशान किसान ने टीसीबीटी के प्रार्थना, अग्निहोत्र, ऊर्जा जल और गोवर्धन खाद जैसी प्रक्रियाएँ अपनाकर प्रति एकड़ लगभग 65 टन टमाटर और कुल 6 एकड़ से 80 लाख रुपये की बिक्री प्राप्त की, साथ ही लागत करीब 30% घटी और उपज लगभग 30% बढ़ी।
– श्री नितीन सेवले, ग्राम मोकभंगी, जिला नासिक, महाराष्ट्र

रसायन आधारित खेती के कारण सख्त हो चुकी भूमि में प्रार्थना, अग्निहोत्र, ऊर्जा जल, अन्न द्रव्य रसायन और कचरा मल्चिंग अपनाने से मिट्टी की नमी धारण क्षमता बढ़ी, कार्बन स्तर में सुधार हुआ और खेत धीरे-धीरे नरम, सुगंधित और उपजाऊ बन गया।
– चंदन कुमार मोतीलाल जाट, ग्राम टवलई, जिला धार, मध्यप्रदेश

2019 से जैविक खेती की शुरुआत करके कपास, गेहूँ, चना और सरसों जैसी फसलों में ताराचंद बेलजी तकनीक से भूमि उपचार किया गया, जिससे सरसों में प्रति एकड़ 12.70 क्विंटल और कपास में 14 क्विंटल तक की उपज मिली तथा खेती की पद्धति और जीवनशैली दोनों में बड़ा बदलाव आया।
– श्री कृष्ण शर्मा, ग्राम बुढेड़ा, भिवानी, हरियाणा

बड़े पैमाने पर टीसीबीटी तकनीक अपनाकर लगभग 1150 एकड़ में मिश्रित बागवानी और फसलों का जैविक उत्पादन किया गया, जहाँ हर फसल की उपज रासायनिक मॉडल से अधिक रही और कुल कारोबार लगभग 35 करोड़ रुपये तक पहुँचा।
– श्री लेखराम यादव, ग्राम गोरधनपरा, कोटपुतली, राजस्थान

लगभग 100 गायों के पंचगव्य को टीसीबीटी के विभिन्न घोलों के साथ मिलाकर 60 एकड़ में केला, पपीता, चना, मक्का, लहसुन और प्याज की खेती करते हुए पंचमहाभूत संतुलित किए गए, जिससे रोग लगभग समाप्त हुए और 56 भोग वाटिका के रूप में विविध फल-फूल और औषधीय पौधे तैयार हुए।
– श्री बाबलाल कागू, ग्राम मनवाड़ा, जिला बड़वानी, मध्यप्रदेश

फंगस से सूखती तरबूज की फसल में ऊर्जा जल और छाछ द्रव्य रसायन अपनाने से पौधे फिर से हरे-भरे हुए और लगभग 200 क्विंटल उपज मिली, बाद में आधा एकड़ खरबूज में पूरी तरह टीसीबीटी पद्धति अपनाकर लगभग 1.5 लाख रुपये की आय प्राप्त हुई।
– श्री निखिल रजक, करेली, मध्यप्रदेश

13 एकड़ में एक साथ टीसीबीटी खेती शुरू कर सरसों के पौधे 11 फुट तक बढ़े, प्रति एकड़ 8 क्विंटल सरसों और 10 एकड़ में लगभग 19 क्विंटल प्रति एकड़ गेहूँ प्राप्त हुआ, साथ ही बासमती धान में लगभग 35 क्विंटल प्रति एकड़ तक की उपज दर्ज हुई।
– किtta बरार, ग्राम बराड़कला, जिला मुक्तसर साहिब, पंजाब

मध्यप्रदेश राज्य जैविक प्रमाणन के अंतर्गत 52 एकड़ में जैविक मॉडल अपनाने से मिट्टी का कार्बन लगभग 1.8% तक पहुँचा, मिर्च की फसल फंगस, वायरस और रसचूसक कीटों से मुक्त रही और औसतन प्रति एकड़ 400 क्विंटल तक उत्पादन मिला।
– विनय सिंह ठाकुर, ग्राम फुलर, जिला जबलपुर, मध्यप्रदेश

पंचगव्य और टीसीबीटी ऊर्जा विज्ञान को मिलाकर 60 एकड़ में विविध फसलें उगाई जा रही हैं, जहाँ केवल 2.5 एकड़ पपीता से लगभग 7.5 लाख रुपये की आय के साथ रोग-मुक्त, स्वादिष्ट और अधिक मीठे फल प्राप्त हुए।
– बाबू लाल काग, बड़वानी, मध्यप्रदेश

डेढ़ एकड़ ग्वारफली की फसल ओलावृष्टि से जमीन पर गिर गई थी, लेकिन सलाह के अनुसार ऊर्जा जल, अणु जल और अन्न द्रव्य रसायन की तीन गुनी मात्रा देने पर पौधे फिर से फुटकर बढ़े, चार तोड़ाई में कुल लगभग 3 लाख रुपये की आय से पूरा कर्ज चुकाया गया।
– राहुल कुमार, हाथरस, उत्तर प्रदेश

2018 में पंचमहाभूत कृषि का प्रशिक्षण लेकर सजीव जल, षडरस और जैव रसायन के प्रयोग शुरू किए गए, फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाने से कार्बन स्तर लगभग 2.5% तक पहुँचा और मक्का, ज्वारी, मौसंबी व सब्जियों में रोग-मुक्त, उच्च गुणवत्ता की उपज मिलने लगी।
– संजय महाजन, ग्राम भोडगांव, जिला जलगाँव, महाराष्ट्र
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