TCBT JAIVIK KISHAN
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  • TCBT वृक्षायुर्वेद विज्ञान 

    खनिज तत्वों की कमी का संपूर्ण समाधान

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पौधो  मे अलग-अलग तत्वों की कमी

नाइट्रोजन की कमी के लक्षण
  • पत्तियों का पीला पड़ना – पहले पुरानी पत्तियाँ पीली पड़ने लगती हैं; इसे हरिमाहीनता कहा जाता है।

  • विकास में रुकावट – पौधों की वृद्धि धीमी हो जाती है और वे आकार में छोटे रह जाते हैं।

  • पत्तियों का झड़ना – पुरानी पत्तियाँ समय से पहले गिरने लगती हैं।

  • पत्तियों का पतला होना – पत्तियाँ पतली और कमजोर हो जाती हैं।

  • फूल और फल का गिरना – फूल और फल समय से पहले गिरने लगते हैं तथा फल छोटे रह जाते हैं।

  • पत्तियों का मुरझाना – पत्तियाँ मुरझाने लगती हैं और पौध की नई वृद्धि सूख जाती है।

फास्फोरस की कमी के लक्षण
  • पत्तियों का गहरा हरा या बैंगनी रंग – फास्फोरस की कमी से पत्तियों का रंग गहरा हरा, बैंगनी या नीला हो जाता है। यह लक्षण सबसे पहले पुरानी पत्तियों में दिखाई देता है।

  • विकास में रुकावट – पौधों की वृद्धि धीमी हो जाती है, वे छोटे रह जाते हैं, और जड़ें कमजोर होकर उनका विकास रुक जाता है।

  • पत्तियों का मुड़ना – पत्तियाँ नीचे की ओर मुड़ने लगती हैं और उनका आकार छोटा हो जाता है।

  • पत्तियों का झड़ना – पुरानी पत्तियाँ समय से पहले गिर जाती हैं।

  • फूल और फल का गिरना – फास्फोरस की कमी से फूल और फल छोटे रह जाते हैं या समय से पहले गिर सकते हैं।

पोटाश (पोटेशियम) की कमी के लक्षण
  • पत्तियों के किनारों से पीला होना – पोटेशियम की कमी से पत्तियों के किनारे पीले हो जाते हैं जबकि बीच का हिस्सा हरा रहता है। यह लक्षण सबसे पहले पुरानी पत्तियों में दिखाई देता है।

  • पत्तियों पर भूरे धब्बे – पत्तियों पर भूरे या जलने जैसे धब्बे बनने लगते हैं। ये धब्बे आमतौर पर पत्तियों के किनारों और निचले हिस्से में अधिक होते हैं।

  • पत्तियों का मुड़ना और सूखना – पत्तियाँ किनारों से मुड़ने लगती हैं और धीरे-धीरे सूख जाती हैं।

  • विकास में रुकावट – पौधों की वृद्धि धीमी हो जाती है, वे कमजोर हो जाते हैं, जड़ें भी कमजोर होकर उनका विकास रुक जाता है।

  • फूल और फल का गिरना – फूल और फल छोटे रह जाते हैं या समय से पहले गिरने लगते हैं।

सल्फर (गंधक) की कमी के लक्षण
  • नई पत्तियों का पीला होना – सल्फर की कमी का सबसे प्रमुख लक्षण नई पत्तियों का पीला होना है। यह नाइट्रोजन की कमी से भिन्न होता है, क्योंकि नाइट्रोजन की कमी में पुरानी पत्तियाँ पीली होती हैं।

  • पत्तियों का छोटा और पतला होना – सल्फर की कमी से पत्तियाँ आकार में छोटी और बनावट में पतली हो जाती हैं, जिससे पौधे की सामान्य वृद्धि प्रभावित होती है।

  • पत्तियों का मुड़ना – पत्तियाँ किनारों से मुड़ने लगती हैं और उनका रंग हल्का पीला दिखाई देता है।

  • तने का पतला रह जाना – इस कमी से तना कमजोर और पतला हो जाता है, जिससे पौधे की संरचनात्मक मजबूती कम हो जाती है।

  • फूल और फल का गिरना – फूल और फल छोटे रह जाते हैं या समय से पहले गिर जाते हैं।

  • जड़ों का कमजोर होना – जड़ें कमजोर पड़ जाती हैं और उनका विकास धीमा होकर पौधे की पोषण ग्रहण करने की क्षमता कम हो जाती है।


जिंक की कमी के लक्षण
  • जिंक की कमी से नई पत्तियाँ छोटी, विकृत और हल्की पीली हो जाती हैं, खासकर पत्तियों की नसों के बीच।

  • पत्तियों पर सफेद या भूरे धब्बे दिखाई देते हैं, जो किनारों और निचले हिस्से में अधिक होते हैं।

  • पौधों की वृद्धि धीमी हो जाती है, जड़ें कमजोर हो जाती हैं और विकास रुक जाता है।

  • पत्तियाँ किनारों से मुड़ने लगती हैं और सूख जाती हैं।

  • फूल और फल छोटे रह जाते हैं या गिर जाते हैं।

कैल्शियम की कमी के लक्षण
  • कैल्शियम की कमी से नई पत्तियाँ विकृत हो जाती हैं, पीली और भूरे धब्बों वाली, किनारों से मुड़ने और सूखने लगती हैं।

  • जड़ें कमजोर होकर उनका विकास रुक जाता है, और तना पतला, कमजोर हो जाता है, जिससे पौधे की संरचना प्रभावित होती है।

  • फूल और फल छोटे रह जाते हैं या गिर जाते हैं।

कापर की कमी के लक्षण
  • पत्तियों का पीला होना – खासकर नई पत्तियों में नसों के बीच हल्का पीला रंग दिखता है।

  • पत्तियों पर भूरे या काले छोटे धब्बे – ये धब्बे नसों के बीच अधिक स्पष्ट होते हैं।

  • पत्तियों का किनारों से मुड़ना और सूखना – यह लक्षण सबसे पहले नई पत्तियों में दिखाई देता है।

  • नई पत्तियाँ छोटी और विकृत हो जाती हैं।

  • पत्तियाँ समय से पहले झड़ने लगती हैं।

  • पौधों की वृद्धि धीमी हो जाती है और वे कमजोर हो जाते हैं।

बोरोन की कमी के लक्षण
  • पत्तियों का पीला होना - बोरोन की कमी से पत्तियों का रंग हल्का पीला हो जाता है खासकर नई पत्तियों में यह लक्षण सबसे पहले पत्तियों की नसों के बीच में दिखाई देता है। 
  • पत्तियों का विकृत होना - नई पत्तियां विकृत और बेडौल हो जाती हैं पत्तियों के किनारे भंगुर और बदरंग हो सकते हैं। 
  • पत्तियों पर भूरे धब्बे - पत्तियों पर छोटे भूरे या काले धब्बे दिखाई देने लगते हैं यह लक्षण भी नसों के बीच अधिक स्पष्ट होता है।
  • पत्तियों का मुड़ना, सूखना और झड़ना- पत्तियां किनारों से मुड़ने लगती हैं और सूख जाती हैं यह लक्षण भी सबसे पहले नई पत्तियों में दिखाई देता है। पत्तियां समय से पहले झड़ने लगती हैं। 
  • विकास में रुकावट- पौधों की वृद्धि धीमी हो जाती है और वे कमजोर हो जाते हैं। 
  • फलों का विकृत होना- बोरोन की कमी से फलों का विकास असामान्य हो सकता है जिसमें विकृति टूटना और गूदे की खराब गुणवत्ता शामिल है।
मोलिब्डेनम की कमी के लक्षण
  • पत्तियों का पीला होना मोलिब्डेनम की कमी से पत्तियों का रंग हल्का पीला हो जाता है खासकर पुरानी पत्तियों में यह लक्षण
  • सबसे पहले पत्तियों की नसों के बीच में दिखाई देता है।
  • पत्तियों का विकृत होना नई पत्तियां विकृत और बेडौल हो जाती हैं पत्तियों के किनारे भंगुर और बदरंग हो सकते हैं।
  • पत्तियों पर भूरे धब्बे पत्तियों पर छोटे भूरे या काले धब्बे दिखाई देने लगते हैं यह लक्षण भी नसों के बीच अधिक स्पष्ट होता है।
  • पत्तियों का मुड़ना और सूखना- पत्तियां किनारों से मुड़ने लगती हैं और सूख जाती हैं यह लक्षण भी सबसे पहले पुरानी पत्तियों में दिखाई देता है।
  • पत्तियों का झड़ना- मोलिब्डेनम की कमी से पत्तियां समय से पहले झड़ने लगती हैं।
  • विकास में रुकावट- पौधों की वृद्धि धीमी हो जाती है और वे कमजोर हो जाते हैं
सिलिकॉन की कमी के लक्षण
  • पत्तों का कमजोर होना सिलिकॉन की कमी से पत्ते कमजोर और पतले हो सकते हैं यह पौधे की संरचना को कमजोर कर सकता है।
  • पत्तों का पीला पड़ना- सिलिकॉन की कमी से पत्तों का रंग पीला हो सकता है खासकर नई पत्तियों में 
  • पत्तों पर धब्बे - पत्तों पर भूरे या काले धब्बे दिखाई दे सकते हैं जो सिलिकॉन की कमी का संकेत हो सकते हैं।
  • पत्तों का मुड़ना- सिलिकॉन की कमी से पत्ते मुड़ सकते हैं या विकृत हो सकते हैं जिससे पौधे की वृद्धि प्रभावित हो सकती है।
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी - सिलिकॉन की कमी से पौधे की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो सकती है जिससे फफूंद और अन्य रोगों का खतरा बढ़ जाता है।

समाधान:

नाइट्रोजन की कमी
हर अमावस्या और पूर्णिमा को जड़ों के पास High C:N ratio वाला घोल (कार्बन-नाइट्रोजन संतुलित मिश्रण) देना चाहिए।
साथ ही, आवश्यकता अनुसार पोटेशियम, कैल्शियम और मैग्नीशियम को भूमि पर डालना चाहिए ताकि पौधे को संतुलित पोषण मिल सके।
फास्फोरस की कमी
  • बुवाई के समय फॉस्फेट उर्वरक (जैसे रॉक फॉस्फेट या DAP) मिट्टी में मिलाएँ।

  • फसल की वृद्धि अवधि में जड़ों के पास फसल घुट्टी या जीवन ऊर्जा जैसे फॉस्फोरस-समृद्ध घोल दें।

  • फास्फो पोटाश का छिड़काव करें ताकि पौधों को तुरंत पोषण मिल सके।

पोटाश (पोटेशियम) की कमी
  • फसल की अवधि में फसल छुट्टी और जीवन ऊर्जा जैसे पोषक घोल जड़ों के पास दें।

  • मिट्टी में पोटेशियम (म्यूरिएट ऑफ पोटाश या सल्फेट ऑफ पोटाश) को जड़ों के पास मिलाएँ।

  • पौधों पर फास्फो पोटाश का छिड़काव करें ताकि पोषक तत्व सीधे पत्तियों द्वारा अवशोषित हो सकें।

सल्फर (गंधक) की कमी
  • राह सेल (लगभग 25 किलोग्राम प्रति एकड़) मिट्टी में मिलाएँ ताकि सल्फर की पूर्ति हो सके।

  • खनिज भस्म के घोल में राह सल्फर तरल मिलाकर फसलों पर छिड़काव करें जिससे तेज़ अवशोषण हो।

जिंक की कमी
जिंक भस्म को मिट्टी में डालना और चिलेटेड जिंक का पत्तियों पर स्प्रे करना शामिल है ताकि पोषण की कमी को दूर किया जा सके।
कैल्शियम की कमी
राह कैल को मिट्टी में डालना और राह कैल का स्प्रे करना शामिल है ताकि पौधों में कैल्शियम की कमी पूरी हो सके।
कापर की कमी
  • राह खनिज भस्म को मिट्टी में डालें।

  • राह कापर तरल का स्प्रे करें, ताकि कमी पूरी हो सके।

बोरोन की कमी

राह खनिज भस्म को जमीन पर डाले और राह खनिज तरल का स्प्रे करें।

मोलिब्डेनम की कमी

खनिज भस्म को जमीन पर डाले और राह खनिज तरल का स्प्रे करें।

सिलिकॉन की कमी

राह स्वाइल कंडिशनर जमीन पर डालें, जैव रसायन, भस्म रसायन हर सिंचाई के पानी में मिलाकर दें।

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